श्रीमद्भगवद्गीता के अमर श्लोक
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
गीता के अमर श्लोक
जीवन की भागदौड़ में मन अशांत है? निर्णय लेने में उलझन है? इन सबका उत्तर श्रीमद्भगवद्गीता में है।
पाँच श्लोक, जो जीवन बदल सकते हैं
कर्म योग · अध्याय 2, श्लोक 47
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं। इसलिए फल की चिंता छोड़कर पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य करो, और कर्म न करने में भी आसक्ति मत रखो।
आत्मा अमर है · अध्याय 2, श्लोक 20
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
आत्मा न कभी जन्म लेती है, न मरती है। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती। यह ज्ञान हमें भय और शोक से ऊपर उठने की शक्ति देता है।
भगवान का वचन · अध्याय 4, श्लोक 7
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं धर्म की स्थापना के लिए प्रकट होता हूँ। यह श्लोक हमें आशा और विश्वास देता है।
मन पर विजय · अध्याय 6, श्लोक 5
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
मनुष्य को अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिए, अपना पतन नहीं। क्योंकि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु भी।
शरणागति और शांति · अध्याय 18, श्लोक 66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
सब कुछ छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो। श्रीकृष्ण का यह आश्वासन मन को गहरी शांति देता है।
रोज़ गीता क्यों पढ़नी चाहिए?
- मन की शांति: सफलता और असफलता दोनों में संतुलित रहना सिखाती है।
- सही निर्णय की क्षमता: अर्जुन की दुविधा हर इंसान की दुविधा है, और श्रीकृष्ण के उत्तर हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
- तनाव-मुक्त कार्य: कर्म योग सिखाता है कि पूरी लगन से काम करो, पर फल की चिंता मत करो।
- आत्म-अनुशासन और एकाग्रता: मन पर नियंत्रण और मज़बूत चरित्र का निर्माण होता है।
- कठिन समय में हिम्मत: आत्मा के अमरत्व का ज्ञान भय और दुःख को कम करता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: भक्ति, ज्ञान, ध्यान और मोक्ष के मार्ग को समझाती है।
- हर उम्र के लिए उपयोगी: विद्यार्थी, नौकरीपेशा और बुज़ुर्ग, सभी को लाभ मिलता है।
रोज़ सिर्फ 10 मिनट गीता पढ़ने से सोचने और जीने का तरीका बदल सकता है। 🌸
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