रामचरितमानस की अमर चौपाइयाँ
रामचरितमानस की अमर चौपाइयाँ 🚩 जय श्री राम 🚩 रामचरितमानस की अमर चौपाइयाँ जब जीवन में धैर्य टूटने लगे, मन उलझन में हो या सही राह न दिखे, तब गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाइयाँ सहारा बनती हैं। पाँच चौपाइयाँ, जो जीवन को राह दिखाती हैं प्रभु की इच्छा सर्वोपरि · बालकाण्ड होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ जो कुछ श्रीराम ने रच रखा है, वही होगा। फिर व्यर्थ तर्क-वितर्क करके बात को क्यों बढ़ाना? यह चौपाई हमें चिंता छोड़कर प्रभु पर भरोसा रखना सिखाती है। वचन की मर्यादा · अयोध्याकाण्ड रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्राण जाहुँ बरु बचनु न जाई॥ रघुकुल की परंपरा सदा से यही रही है कि प्राण भले चले जाएँ, पर दिया हुआ वचन नहीं जाना चाहिए। यह चौपाई सत्य और वचन-पालन का आदर्श है। कठिन समय की परीक्षा · अरण्यकाण्ड धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परखिअहिं चारी॥ धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी, इन चारों की परीक्षा विपत्ति के समय होती है। मुश्किल घड़ी में ही असली साथ और असली संयम का पता चलता है। सुमति और ...